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सीएए पर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री के खिलाफ एफआईआर की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने वकील को फटकारा -

सीएए पर प्रधानमंत्री, गृहमंत्री के खिलाफ एफआईआर की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने वकील को फटकारा

नई दिल्ली // उच्चतम न्यायालय ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता वकील को कड़ी फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील से पूछा कि आपको किसने लाइसेंस दिया है। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से वकील पर 50 हजार के जुर्माने के आदेश को स्थगित करने का आदेश दिया। संबंधित वकील ने इसके पहले उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने याचिका खारिज करते हुए वकील पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया था। उच्च न्यायालय ने कहा था कि ये तुच्छ याचिका है और ये न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

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मुख्य न्यायाधीश ने वकील द्वारा बैंड नहीं पहनने पर ऐतराज जताते हुए कहा कि बैंड वैंड पहने नहीं है…

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इन पर उच्च न्यायालय ने कोई जुर्माना नहीं लगाया। मुख्य न्यायाधीश ने वकील द्वारा बैंड नहीं पहनने पर ऐतराज जताते हुए कहा कि बैंड वैंड पहने नहीं है, लगा कोई दंगल में उतरने आये हैं। जब उच्चतम न्यायालय को पता चला कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने जुर्माना लगाया है तब वकील से पूछा कि आप कब से प्रैक्टिस कर रहे हैं। वकील ने कहा कि 1995 से। तब मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आपको किसने लाइसेंस देने की गलती की। आप इस तरह की याचिका मत दायर कीजिए। अगर आप इस तरह की याचिका दायर करेंगे तो लोग कैसे विश्वास करेंगे।सुनवाई के दौरान जब याचिकाकर्ता ने विचारधारा से जुड़ी आपत्तियां उठाईं तो मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि किसी की राजनीति या सोच से असहमति होना उसे अपराध नहीं बना देता।

मान लीजिए, अगर संसद कोई अवैध कानून पारित करती है तो क्या वह अपराध है।

अगर आप और दबाव डालेंगे तो हमें जुर्माना बढ़ाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मान लीजिए, अगर संसद कोई अवैध कानून पारित करती है तो क्या वह अपराध है। आप अपना बयान वापस लें। कोर्ट की सख्त टिप्पणी पर याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले लिया।याचिकाकर्ता ने कोर्ट को भरोसा दिया कि वह अलवर के एसएचओ को भेजी गई 2020 की शिकायत के संबंध में किसी भी कोर्ट में या किसी अन्य रुप में कोई शिकायत या आवेदन दायर नहीं करेगा।

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